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Shri Khatushyam Dham: श्री खाटूश्याम धाम से रेवाड़ी का पुराना नाता, श्याम बहादुर अग्रवाल थे श्री खाटूश्याम के प्रथम परम भक्त

Shri Khatushyam Dham

Shri Khatushyam Dham: कहा जाता है कि सीकर के राजा ने श्री खाटूश्याम मंदिर पर कब्जा करके ताला लगा दिया था। तब रेवाड़ी के रहने वाले श्याम बहादुर अग्रवाल मंदिर में बाबा के दर्शन करने गए थे। लेकिन राजा के सैनिकों ने मंदिर में दर्शन नही करने दिये थे। सैनिकों ने कहा था कि तुम बाबा के असली भक्त हो तो खुद दरवाजा खुलवा लो।

मोरपंख छड़ी से खोला मंदिर का दरवाजा

जिसके बाद श्याम बहादुर अग्रवाल जी ने मोरपंख छड़ी को मंदिर (Shri Khatushyam Dham) पर लगे ताले पर मारा और मंदिर का ताला टूटकर कपाट खुद पे खुद खुल गए। जिसके बाद से श्री खाटूश्याम के प्रति लोगों की श्रद्धा और बढ़ गई और श्याम बहादुर अग्रवाल को प्रथम भक्त के रूप में जाने जाना लगा ।

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बहरोड़ के एक असहाय को चमत्कार से दिलाई आँखों की रोशनी

श्री श्याम बहादुर अग्रवाल के वंशज अनमोल अग्रवाल बताते है कि श्याम बहादुर अग्रवाल का असली नाम श्याम सुंदर अग्रवाल था। उनके पूर्वज राजस्थान के तिजारा में रहते थे। उस वक्त वहाँ पर भी श्री खाटूश्याम का मंदिर (Shri Khatushyam Dham) बनवाया गया था। जिसके बाद वे रेवाड़ी शहर में आकर रहने लगे थे।

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उनके वंशज अनमोल अग्रवाल बताते है कि 1937 में बाबा ने मोरपंख छड़ी से मंदिर का ताला खोला था। एक बार बहरोड़ एक असहाय को चमत्कार से आँखों की रोशनी भी दिलाई गई थी। उस वक्त बाबा की एक आँख की रोशनी चली गई थी और उस असाहय व्यक्ति की आँख की रोशनी आ गई थी। जिसके बाद बहरोड़ में भी श्री खाटूश्याम का मंदिर बनाया गया था।

Shri Khatushyam Dham

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बड़े-बड़े कथा वाचक और भजन गायक गद्दी पर लगाते है हाजरी

शहर के ठठेरा चौक स्थित कायस्थवाड़ा में श्याम बहादुर अग्रवाल की तस्वीर लगी ये वहीं जगह है। जहाँ श्याम बहादुर अग्रवाल रहते रहते थे। उनके निधन के बाद पीढ़ी दर पीढ़ी उनके वंशज भी श्री खाटूश्याम (Shri Khatushyam Dham)  के प्रचार में लगे है। रेवाड़ी में श्याम बहादुर अग्रवाल के गद्दी की महिमा भी एसी है कि श्रद्धालु यहाँ पर भी अर्जी लगाने पहुँचते है। बड़े-बड़े कथा वाचक और भजन गायक भी रेवाड़ी में आते ही पहले श्री श्याम बहादुर अग्रवाल की गद्दी पर हाजरी लगाते है।

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