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Randhir Singh Kapriwas की भाजपा में दौबारा एंट्री, विरोधियों का बिगाड़ेंगे खेल

Randhir Singh Kapriwas

रेवाड़ी विधानसभा में कापड़ीवास का है खुद का जनाधार

रेवाड़ी विधानसभा में Randhir Singh kapriwas का खुद का जनाधार है। उसका अंदाजा इस बार ये लगाया जा सकता है कि उन्होने कई बार निर्दलीय चुनाव लड़कर अच्छा खासा वोट प्रतिशत हासिल किया था। 2019 का विधानसभा चुनाव भी Rewari से भाजपा इसलिए हार गई थी क्योंकि भाजपा के शीर्ष नेत्रत्व ने कापड़ीवास की अनदेखी की और कापड़ीवास ने निर्दलीय रेवाड़ी विधानसभा से चुनाव लड़ा। जिसका नतीजा ये हुआ कि असली –नकली BJP की सियासी जंग में कॉंग्रेस से चिरंजीव राव ने जीत दर्ज कर ली।

 

इसलिए कापड़ीवास को भाजपा ने किया था निष्कासित

बता दें कि 2019 के विधानसभा चुनाव से पहले रेवाड़ी विधानसभा से केंद्रीय राज्यमंत्री राव इंद्रजीत सिंह समर्थित सुनील मूसेपुर को भाजपा की टिकट दिये जाने के बाद Randhir Singh Kapriwas भाजपा से बागी हो गए थे। उन्होने पार्टी के निर्देशों को दरकिनार करते हुये असली भाजपा और नकली BJP के बीच सियासी जंग शुरू कर दी थी। जिसके कारण पार्टी हाईकमान ने कापड़ीवास को निष्कासित कर दिया था।

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2014 में कापड़ीवास भाजपा की टिकट पर बने थे विधायक

रणधीर सिंह कापड़ीवास ने 1996 में पहली बार Rewari  विधानसभा से चुनाव लड़ा था। जिसके बाद से भाजपा से उन्हे टिकट मिली या नहीं मिली,  वो लगातार विधानसभा चुनाव लड़ते रहें। लेकिन किस्मत ने उनका साथ नहीं दिया। जिसके बाद वर्ष 2014 में Randhir Singh Kapriwas को भाजपा ने टिकट दी और पहली बार रेवाड़ी विधानसभा से भाजपा उम्मीदार ने जीत दर्ज की। 2019 के विधानसभा चुनाव में निर्दलीय चुनावी मैदान में उतरे कापड़ीवास ने भाजपा और कॉंग्रेस दोनों के उम्मीदवारों की कड़ी टक्कर दी थी।

 

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कापड़ीवास विरोधियों का बिगाड़ेंगे खेल  

स्थानीय सांसद एवं केंद्रीय राज्यमंत्री राव इंद्रजीत सिंह और रणधीर सिंह कापड़ीवास दोनों धुर विरोधी है। राव इंद्रजीत सिंह भी अक्सर अपने भाषण में बोलते आयें है कि भाजपा के जयचंदों की वजह से BJP Rewari सीट हार गई। जबकी कापड़ीवास भी राव इंद्रजीत सिंह को अहंकारी और परिवारवाद की राजनीति करने वाला बताकर लगातार जुबानी हमला बोलते आयें है। ऐसे में भाजपा में कापड़ीवास की दौबारा एंट्री से राव इंद्रजीत सिंह को भी झटका है।

Randhir Singh Kapriwas विरोधी होने के साथ-साथ उसका दूसरा कारण ये है कि राव इंद्रजीत सिंह अपनी बेटी आरती राव को रेवाड़ी से भाजपा की टिकट देने की दावेदारी एक बार फिर पेश कर सकते है। 2019 के चुनाव में भी उन्होने बेटी आरती के लिए रेवाड़ी से टिकट मांगी थी लेकिन एक परिवार में दो टिकट ना देने के चलते आरती को टिकट नहीं मिली थी।

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