Haryana News: हरियाणा सरकार द्वारा अरावली की पहाड़ियों में एक विशाल जंगल सफारी प्रोजेक्ट की घोषणा की गई है, जो ना केवल इको-टूरिज्म को बढ़ावा देगा, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और युवाओं के लिए रोजगार के अवसर प्रदान करेगा। जानें इसकी खास बातें-
एशिया की सबसे बड़ी जंगल सफारी
यह जंगल सफारी अरावली की पहाड़ियों में लगभग 10 हजार एकड़ में फैली होगी, जिससे इसे देश की सबसे बड़ी और शायद एशिया की सबसे बड़ी सफारी होगी। अरावली की ये पर्वत श्रृंखला हरियाणा, राजस्थान और दिल्ली तक फैली हुई है। इस क्षेत्र में प्राकृतिक जैव विविधता पहले से मौजूद है, इससे पर्यटकों को शानदार अनुभव मिलेगा।
वन्यजीवों को मिलेगा प्राकृतिक माहौल जैसा घर
इस सफारी में जानवरों और पक्षियों को ऐसा माहौल प्रदान किया जाएगा जो उनके प्राकृतिक आवास के बेहद करीब होगा। यह एक पारंपरिक चिड़ियाघर नहीं होगा जहां जानवर पिंजरों में कैद होते हैं, बल्कि यह एक खुला और प्राकृतिक इको-सिस्टम होगा जहां पर्यटक जानवरों को नजदीक से, सुरक्षित तरीके से देख सकेंगे।
वनतारा से ली गई प्रेरणा
हाल ही में हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी, केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल और पर्यावरण मंत्री राव नरबीर सिंह ने गुजरात के जामनगर स्थित वनतारा एनिमल रेस्क्यू सेंटर का दौरा किया। हरियाणा की जंगल सफारी में भी ऐसे ही इको-फ्रेंडली डिज़ाइन और आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल किया जाएगा।
पर्यावरण संरक्षण होगा प्राथमिक लक्ष्य
यह परियोजना केवल पर्यटन के लिए नहीं, बल्कि एक बड़े इको-कॉन्सर्वेशन मिशन के रूप में तैयार की जा रही है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि सफारी के निर्माण और संचालन के दौरान अरावली के इकोसिस्टम को पूरी तरह संरक्षित रखा जाएगा। इस पहल से जैव विविधता को नया जीवन मिलेगा।
युवाओं को मिलेगा रोजगार
इस परियोजना से स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर खुलेंगे। सफारी गाइड, जंगल स्टाफ, होटल और ट्रांसपोर्ट से जुड़े रोजगार, पर्यटक सेवाओं से नौकरियां पैदा होंगी। इससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी, और पर्यटन के ज़रिए हरियाणा के ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में विकास होगा।
हरियाणा को ग्लोबल टूरिज्म मैप पर लाने की तैयारी
मुख्यमंत्री सैनी के नेतृत्व में सरकार का लक्ष्य है कि यह जंगल सफारी केवल एक दर्शनीय स्थल न रह जाए, बल्कि हरियाणा को अंतरराष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर लाने वाला एक प्रमुख आकर्षण बने।