Haryana: हरियाणा से बड़ी खबर सामने आ रही है। हरियाणा के भिवानी जिला के गांव चांग, बामला, सरसा, ढाणी हरसुख, रिवाड़ी खेड़ा में की जाने वाली गाजर की खेती देश ही नहीं बल्कि विदेशों तक मशहूर हैं।
जानकारी के मुताबिक, खास इसलिए है कि यहां की जलवायु और मिट्टी इसके लिए बहुत उपयुक्त है। गाजर की खेती करने के लिए अक्टूबर से नवंबर तक का समय सबसे अच्छा माना जाता है। गाजर की कई उत्तम किस्मे होती है, जैसे कि पूसा रुधिरा और पूसा केसर, जो कम समय में अच्छा मुनाफा देती हैं। Haryana News
मिली जानकारी के अनुसार, यहां के किसानों का कहना है कि गाजर की खेती के लिए भुरभुरी दोमट मिट्टी सबसे अच्छी मानी जाती है, जिसमें जल निकासी की अच्छी व्यवस्था हो। खेत तैयार करते समय 10-12 बार जुताई करनी चाहिए और प्रति एकड़ खेत में 40 किलो नाइट्रोजन, 20 किलो फास्फोरस और 20 किलो पोटाश डालना उचित रहता है। यानी क्षेत्र की जलवायु व मिट्टी गाजर की खेती के लिए उपयुक्त है। Haryana News
जानकारी के मुताबिक, बता दें कि भिवानी में गाजर की खेती से किसानों को अच्छा मुनाफा होता है, क्योंकि यहां की गाजर की मांग बहुत ज्यादा रहती। किसानों ने बताया कि गाजर की ऑर्गेनिक खेती भी की जा सकती है अगर गोबर की खाद डालकर बिजाई की जाए। इससे उत्तम किस्म की फसल हो जाती है। एक एकड़ में औसतन 100 क्विंटल तक पैदावार होती है, जिसका औसत भाव 20 से 30 रुपये प्रति किलो तक मिल जाता है। Haryana News
मिली जानकारी के अनुसार, गाजर की बिजाई भी मशीनों से की जाती और खुदाई भी ट्रेक्टरों द्वारा होती है, जिससे लगभग 20 परिवारों को रोजगार मिलता है। गाजर की धुलाई भी मशीनों से की जाती है ताकि उत्तम किस्म गाजर में निखार हो सके ऒर गुणवत्ता से भाव भी अच्छा मिल सके। जानकारी के मुताबिक, भिवानी की गाजर न केवल हरियाणा में बल्कि देश व विदेशो में भी जाती है, पंजाब, हिमाचल, यूपी, महाराष्ट्र, राजस्थान, दिल्ली से जैसे भूटान, नेपाल, श्रीलंका तक इसका निर्यात किया जाता है। Haryana News
जानकारी के मुताबिक, सब्जी मंडी प्रधान संजय कुमार ने बताया कि जिले की मंडी से देश व विदेश में भी गाजर का व्यापार किया जाता है, जिससे किसानों को मोटा मुनाफा होता है इसे लाल सोना भी कहा जाता है। यहां की गाजर मशहूर है।