Haryana News: हरियाणा के यमुनानगर की बोली नदी के किनारे सुबह से ही कारीगरों की हलचल शुरु हो जाती है। जैसे ही नदी का पानी कम होता है तो कारीगर अपने पारंपरिक औजारों को लेकर नदी में उतर जाते हैं।
नदी में रेत और मिट्टी को खंगालना शुरू कर देते हैं। इन कारीगरों का काम बेहद मेहनत भरा होता है। नदी की रेत को पहले इकट्ठा किया जाता है और फिर से पानी से धोकर छान लिया जाता है।
इस दौरान रेत में छिपे बारिक सोने के कण अलग कर लिए जाते हैं। कारीगरों क कहना है कि यह हुनर उन्होंने अपने बुजुर्गों से सीखा है। कई पीढियों से उनका परिवार ये काम करता आ रहा है। लेकिन समय के साथ सोने के कण बहुत कम होते जा रहे हैं।
नदी से निकाले गए इस सोने को कारीगर रोजाना सुनारों के पास बेचते हैं। इसी से वे अपने घर का खर्च चलाते हैं। कारीगरों की मानें तो कई बार पूरे दिन की मेहनत के बाद सिर्फ कुछ ही कण सोना हाथ लगता है। लेकिन फिर भी यह उनकी आजीविका का एकमात्र साधन है।