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मोबाईल टावर लगाने के नाम पर ठगी , पुलिस के हत्थे चढ़ा ठग तो ये किये खुलासे

मोबाईल टावर लगाने के नाम पर ठगी , पुलिस के हत्थे चढ़ा ठग तो ये किये खुलासे

अक्सर लोगों के दिमाग में आता है कि क्यों ना मकान – प्लाट पर मोबाइल टावर लगवाकर पैसे कमायें जाएँ . ऐसे लोगों की सोच को निशाना बनाते हुए मोबाइल टावर लगाने के नाम ठग ठगी कर रहे है. और रेवाड़ी साइबर थाना पुलिस ने ऐसे ही एक ठग को गिरफ्तार किया है. जिसने मोबाइल टावर लगाने के नाम पर रेवाड़ी के एक व्यक्ति से धोखाधड़ी की. पुलिस ने शिकायत दर्ज की और तफ्तीश शुरू की तो रेवाड़ी पुलिस हिमाचल प्रदेश में  धीरज नाम के ठग तक जा पहुंची …जिसे पुलिस ने गिरफ्तार कर पूछताछ की तो उसने खुलासा किया है कि उसने हरियाणा , पंजाब और मध्यप्रदेश में भी इसी तरह की चार ठगी की वारदातों को अंजाम दिया हुआ है .

 

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पुलिस के हत्थे चढ़े इस आरोपी से पुलिस ने 80 हजार रूपए , 7 मोबाइल फोन , 11 फर्जी सीमकार्ड , 2 एटीएम कार्ड बरामद किये है . पुलिस का कहना है कि जिस समय आरोपी धीरज ने ठगी की थी उस वक्त वो हरियाणा के करनाल में रहता था , जिसके बाद ये हिमाचल के पोंटासाहिब में अपनी पत्नी के साथ किराए के मकान में ही रह रहा था.  यहाँ आपको बता दें कि आरोपी धीरज का कोई स्थाई पता पुलिस के पास नहीं है ..ठग धीरज ने सबसे पहले ब्लक एसएमएस के जरिये लोगों को टावर लगवाने के लिए मैसेज भेजें …जिनमें से कुछ लोगों के रिप्लाय आयें और चार लोग ठग धीरज के जाल में फंस भी गए . इन चार लोगों में रेवाड़ी के रोझूवास के रहने वाले बलजीत सिंह भी थे.  जिससे जून माह में   अलग अलग ट्रांजेक्शन के जरिये एक लाख 12 हजार की ठगी कर ली गई. यहाँ आरोपी धीरज ने अपने आप को निखिल बताया और कहा कि वो जियो कम्पनी से हूं। जिसके बाद टावर लगाने की फ़ीस , टेक्स आदि का खर्च बताकर ठग पैसे मांगता रहा और पीड़ित बलजीत पैसे फ़ोनपे के जरिये भेजता रहा.

 

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आपको बता दें कि साइबर फ्रोड के मामले लगातार सामने आ रहे है. सरकार साइबर क्राइम को रोकने के लिए साइबर थाने खोल रही है, और लोगों को जागरूक भी कर रही है .. लेकिन जनता की ना समझी उनके खुद साइबर ठगों के जाल में फंसा देती है. और ठगी के बाद अगर शिकायत में देरी होती है तो पैसे वापिस आने की संभावना ना के बराबर हो जाती है.  और इस मामले में पुलिस आरोपी ठग को इसलिए गिरफ्तार कर पाई है क्योंकि जिस फोनपे के नम्बर के जरिये ठगी की गई ..उसी नम्बर के आधार पर पुलिस ने जाँच शुरू की और ठग धीरज के पास हिमाचल प्रदेश तक पहुँच गई. पुलिस ने आरोपी धीरज को दो दिन के पुलिस रिमांड पर लिया है, ताकि जिन सवालों के जवाब पुलिस को नहीं मिले उनके जवाब भी पुलिस पूछकर दूध का दूध पानी का पानी कर सकें   .

 

साइबर थाना पुलिस ने लोगों को ज्यादा सावधानी बरतने की अपील की है .. साथ ही ये भी कहा है कि अगर ठगी का शिकार होते है तो तुरंत पुलिस को सूचित करें ताकि बैंक ट्रांजेक्शन को रोककर पैसा वापिस दिलाया जा सकें . अभी तक करीबन 20 लाख रूपए वो लोगों को वापिस करा चुके है.

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कुल मिलाकर साइबर क्राइम से बचाव और रोकने का एक मात्र तरीका यही है कि सभी जागरूक हो जाएँ, अपने स्मार्ट फोन की तरह खुद भी स्मार्ट बन जाएँ .

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