IGU मीरपुर, रेवाड़ी के छात्र योगेश कुमार को राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रीय NSS पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा। इंदिरा गांधी विश्वविद्यालय से देश के प्रतिष्ठित पुरस्कार को प्राप्त करने वाले वो पहले स्वयंसेवक है। जब वह उच्च शिक्षा ग्रहण करने वर्ष 2017 में इंदिरा गांधी विश्वविद्यालय मीरपुर, रेवाड़ी पहुँचे तो उन्हें अंदाज़ा भी नहीं था कि उनकी ज़िंदगी एक नया मोड़ लेने वाली है।
विश्वविद्यालय में रहते हुए NSS समन्वयक डॉ. दीपक गुप्ता ने उन्हें राष्ट्रीय सेवा योजना से परिचित करवाया और स्वयं जुड़ने के लिए प्रेरित किया। यह पहला कदम उनकी समाज सेवा की नींव बना। शुरुआत में ही उन्हें कार्यक्रम अधिकारी सुशांत यादव मिले, जिनके साथ मिलकर योगेश ने नियमित रूप से सामाजिक कार्य करना शुरू कर दिया।
विश्वविद्यालय स्तरीय शिविरों, जागरूकता कार्यक्रमों और रक्तदान अभियानों में उन्होंने बढ़-चढ़कर भाग लिया। इसके बाद जब राष्ट्रीय स्तर के कैंप की तैयारी शुरू हुई तो नए समन्वयक डॉ. करण सिंह ने योगेश को राष्ट्रीय कैंप में जाने का अवसर दिया। उसी अनुभव ने योगेश के भीतर समाज सेवा को लेकर ओर गहरी लगन पैदा की। फिर आया कोरोना काल। जब ज्यादातर लोग घरों तक सीमित थे, तब सुशांत यादव ने अपनी टीम बनाई जिसमें योगेश भी सक्रिय सदस्य थे।
यह टीम रक्तदान, प्लाज़्मा डोनेशन और जरूरतमंदों को दवाइयाँ, राशन और सहायता पहुँचाने का काम कर रही थी। इस समय सबसे आगे जिन लोगों ने बिना कहे सेवा की उनमें से एक थे योगेश चौधरी – वे अपने घर से सामान लाकर व्यक्तिगत रूप से ज़रूरतमंदों तक पहुँचाते थे। इन अनुभवों ने योगेश को और मज़बूत बनाया। वे विश्वविद्यालय और राज्य स्तरीय भाषण प्रतियोगिताओं में लगातार अव्वल आने लगे।
इसके बाद उनका ध्यान देश के सबसे बड़े कैंप – गणतंत्र दिवस परेड कैंप की ओर गया। योगेश को प्रशिक्षण देने के लिए उनके परम मित्र अमित भारद्वाज हिसार से आते थे। उम्र में छोटे होने के बावजूद अमित ने उन्हें परेड की बारीकियाँ सिखाईं। कड़ी मेहनत रंग लाई – वर्ष 2021 में जब दोबारा चयन हुआ तो योगेश हर स्तर पर चुने जाते रहे और अंततः जनवरी 2022 में उन्होंने इंदिरा गांधी विश्वविद्यालय का इतिहास रच दिया।
इस विश्वविद्यालय के पहले छात्र बने जिसने गणतंत्र दिवस परेड कैंप में भाग लिया। इसके बाद उनके कार्यक्रम अधिकारी सुशांत यादव ने उन्हें राज्य स्तरीय पुरस्कार के लिए भी मेहनत करने के लिए प्रेरित किया। योगेश की लगन रंग लाई और 2023 में उन्हें हरियाणा के राज्यपाल द्वारा राजभवन में राज्य स्तरीय पुरस्कार से सम्मानित किया गया। इस उपलब्धि के बाद उनका समाज सेवा का जज़्बा और बढ़ गया। उन्होंने ठान लिया कि इंदिरा गांधी विश्वविद्यालय का पहला राष्ट्रपति पुरस्कार भी वे ही लेकर आएँगे। यही वह समय था जब उन्होंने अपने परम मित्र अमित भारद्वाज के साथ मिलकर 2021 में युथ सोशलग्राम फाउंडेशन की स्थापना की।
यह संस्था आज 18 राज्यों के 5,000 से अधिक युवाओं के साथ मिलकर काम कर रही है। हाल ही में युवा मामले और खेल मंत्रालय द्वारा वाराणसी में आयोजित ‘यूथ स्पिरिचुअल समिट’ में देश की 100 चुनी हुई संस्थाओं में इसका चयन हुआ। देश की पहली ‘यूथ स्पिरिचुअल समिट’ में युथ सोशलग्राम फाउंडेशन का नेतृत्व करते हुए योगेश चौधरी ने केंद्रीय मंत्रिमंडल के सामने युवाओं को नशे से दूर रखने के लिए कई नए सुझाव भी प्रस्तुत किए, जिन्हें बाद में मंत्रिमंडल ने सराहा।
इस पहल ने योगेश की छवि एक दूरदर्शी और अग्रणी युवा नेता के रूप में और मजबूत की। योगेश कहते हैं कि उनकी यह उपलब्धियाँ डॉ. करण सिंह, डॉ. सुशांत यादव, डॉ. ललित, डॉ. भारती और डॉ. अनीता जैसे अधिकारियों के कार्यकाल में संभव हो पाई। वर्तमान में नव-नियुक्त NSS समन्वयक डॉ. मुकेश यादव ने भी उन्हें शुभकामनाएँ दीं।
इंदिरा गांधी विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर असीम मिगलानी व कुलपति प्रोफेसर दिलबाग सिंह ने छात्र योगेश को बधाई संदेश भेजते हुए कहा – “योगेश चौधरी ने आज विश्वविद्यालय का नाम केवल हरियाणा में ही नहीं बल्कि पूरे देश में रोशन कर दिया है। यह इंदिरा गांधी विश्वविद्यालय के इतिहास की सबसे बड़ी उपलब्धि है।”
योगेश वर्ष 2022 से लगातार गणतंत्र दिवस परेड शिविर का नेतृत्व कर रहे हैं। NSS के साथ उनकी निरंतर सक्रियता और विश्वविद्यालय में उनका नेतृत्व उन्हें पूरे देश के उभरते हुए यूथ आइकन के रूप में स्थापित कर चुका है। अब यह यात्रा अपने स्वर्णिम पड़ाव पर है। 29 सितम्बर 2025 को राष्ट्रपति भवन, नई दिल्ली में महामहिम राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू के हाथों योगेश चौधरी को देश का सर्वोच्च ‘माईभारत – NSS’ राष्ट्रीय सम्मान मिलेगा — वही सम्मान जिसे 1993 में इंदिरा गांधी पुरस्कार के नाम से जाना जाता था। इस घोषणा के बाद विश्वविद्यालय और पूरे क्षेत्र में गर्व और खुशी का माहौल है।
शुभकामनाएं देने वालों का तांता उनके घर और विश्वविद्यालय दोनों जगह लगा हुआ है। मंत्रियों, सांसदों और अधिकारियों ने भी टेलीफोन पर बधाइयाँ दी हैं। योगेश कहते हैं, “जब मैं इंदिरा गांधी विश्वविद्यालय पढ़ने आया था और NSS से जुड़ा था, तब मैंने कभी नहीं सोचा था कि एक दिन ऐसा भी आएगा कि मुझे यह सर्वोच्च राष्ट्रीय सम्मान मिलेगा, जिसका सपना हर भारतीय नागरिक देखता है।”