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रेवाड़ी: धारूहेड़ा के किसान ने शुरू कि जैविक खेती, पिता को कैंसर होने के बाद हुआ एहसास

किसान यशपाल खोला ने बताया कि वर्ष 2017 में उनके पिता को कैंसर हो गया था. डॉक्टर्स ने कैंसर होने की वजह बदलता खानपान बताया था. जिसके बाद उन्हें अहसास हुआ कि पैदावार करने वाले तो वहीँ है. जिसके बाद उन्होंने जैविक खेती पर काम करना शुरू किया और अब जैविक खेती करने वाले उत्पादकों में उनका बड़ा नाम है.   

धारूहेड़ा में 40 एकड़ जमीन पर पिछले 5 वर्षों से मिश्रित खेती कर रहे है. जिनके खेतों में गेहूं , सरसों के अलावा गोभी, घीया, आलू , टमाटर, भिंडी,मिर्च, ब्रोकली, पालन, गाजर, शलजम और मूली सहित 30-35 किस्म की सब्जियों की पैदावार करते है.

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खेती में रोजगार के अच्छे अवसर

यशपाल का कहना है कि खेती में रोजगार के अच्छे अवसर है. युवा नौकरी के पीछे भागने की बजाएं अच्छी खेती करें. क्योंकि आने वाला समय किसानों का ही है. कोरोना काल के बाद बड़ी संख्या में लोगों ने अपने खानपान की तरफ ध्यान दिया है और जैविक खेती को अपनाया है. इसलिए खेती को व्यवसाय के रूप में अपनाकर कार्य करें. जो मदद होगी वो करने के लिए तैयार है. सरकार भी किसानों को बढ़ावा देने के लिए जागरूकता कार्यक्रम चला रही है और अनुदान राशी भी दे रही है.

कई पुरुस्कार अपने नाम कर चुके हैं यशपाल

यशपाल खोला को सब्जी एक्सपो 2020 में गाजर की खेती में हरियाणा में पहला स्थान पाने पर कृषि मंत्री व इजराइल के कृषि विशेषज्ञों द्वारा सम्मानित किया गया था. शताब्दी सीड्स कंपनी ने उन्हें अपना प्रचारक बनाया, वहीं किसान दिवस पर प्रगतिशील किसान अवार्ड से सम्मानित किया गया. उन्हें जिले का जैविक खेती का प्रशासनिक ब्रॉडं एबैंसडर बनाया गया हुआ है.

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कृषि अधिकारी दीपक यादव ने बताया कि सरकार जैविक खेती को बढ़ाने के लिए स्पेशल अभियान चलाकर लोगों को जागरूक कर रही है. सरकार की तरफ से अनुदान भी दिया जा रहा है.

 

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