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हरियाणा और दिल्ली के बीच नहीं होगा जाम, 4700 करोड़ की लागत से बनेगा ‘गेम-चेंजर’ कॉरिडोर

हरियाणा और दिल्ली के बीच नहीं होगा जाम, 4700 करोड़ की लागत से बनेगा 'गेम-चेंजर' कॉरिडोर

दिल्ली और हरियाणा के बीच सफर करने वाालों के लिए एक बड़ी खुशखबरी है. दिल्ली सरकार ने उत्तर-पश्चिम दिल्ली की यातायात व्यवस्था को पूरी तरह बदलने और मुकरबा चौक जैसे व्यस्त इलाकों को जाम से मुक्ति दिलाने के लिए मुनक नहर के किनारे एक 20 किलोमीटर लंबी एलिवेटेड सड़क बनाने का फैसला लिया है. इस सड़क के निर्माण की जिम्‍मेदारी अब दिल्‍ली सरकार ने भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) को सौंप दी है. यह फैसला बड़े पैमाने की हाईवे परियोजनाओं को सफलतापूर्वक पूरा करने में एनएचएआई की विशेषज्ञता को देखते हुए लिया गया है.

मुनक नहर के समानांतर बनने वाला यह कॉरिडोर उत्तर-पश्चिम दिल्ली के इंद्रलोक इलाके को सीधे बवाना से जोड़ेगा. वर्तमान में इन क्षेत्रों के बीच यात्रा करना एक बड़ी चुनौती है, क्योंकि वाहनों को संकरी गलियों और अत्यधिक भीड़भाड़ वाले चौराहों से होकर गुजरना पड़ता है. अधिकारियों के अनुसार, यह सड़क पूरी तरह से सिग्नल-फ्री होगी. इसके बन जाने से न केवल दिल्ली के आंतरिक हिस्सों में यातायात सुगम होगा, बल्कि हरियाणा की ओर जाने वाले वाहनों को भी एक वैकल्पिक और तेज रास्ता मिल सकेगा. अनुमान है कि इस परियोजना के पूरा होने के बाद यात्रा के समय में 40 फीसदी तक की कमी आएगी. प्रोजेक्ट के लिए एक विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार की जा रही है, जिसके अगले तीन महीनों के भीतर फाइनल होने की उम्मीद है.

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4700 करोड़ रुपये होंगे खर्च

टाइम्‍स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली सरकार इस मेगा प्रोजेक्ट के लिए एनएचएआई को लगभग 4,700 करोड़ रुपये उपलब्ध कराएगी. हालांकि निर्माण कार्य की पूरी जिम्मेदारी NHAI की होगी, लेकिन दिल्ली का लोक निर्माण विभाग (PWD) परियोजना की फंडिंग, भूमि की स्वीकृति और स्थानीय नगर निकायों व एजेंसियों के साथ समन्वय स्थापित करने की निगरानी करेगा. अधिकारियों ने बताया कि काम शुरू होने के बाद इसे पूरा करने में लगभग तीन वर्ष का समय लगेगा.

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ट्रैफिक जाम से मिलेगी राहत

मुकरबा चौक दिल्ली के सबसे व्यस्त और पेचीदा ट्रैफिक जंक्शनों में से एक माना जाता है. यहां से गुजरने वाले वाहनों को घंटों जाम का सामना करना पड़ता है. प्रस्तावित एलिवेटेड रोड इस जंक्शन पर दबाव को काफी हद तक कम कर देगा. चूंकि यह सड़क मुनक नहर के ऊपर बनेगी, इसलिए अतिरिक्त भूमि अधिग्रहण की जरूरतें भी कम होंगी. यह कॉरिडोर उत्तर-पश्चिम दिल्ली की शहरी गतिशीलता के लिए एक ‘गेम-चेंजर’ साबित होगा.

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PWD मंत्री प्रवेश वर्मा ने इस पहल की सराहना करते हुए इसे ‘अंतर-एजेंसी समन्वय’ का एक बेहतरीन उदाहरण बताया है. उन्होंने कहा कि दिल्ली सरकार और NHAI का साथ आना यह सुनिश्चित करता है कि बड़े बुनियादी ढांचा प्रोजेक्ट बिना किसी देरी के और उच्चतम गुणवत्ता के साथ पूरे किए जा सकें. यह सहयोगात्मक दृष्टिकोण शहर की भविष्य की जरूरतों को पूरा करने और टिकाऊ शहरी विकास के लिए अत्यंत आवश्यक है.

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